शे’र

तुम्हें क्या पता कि मुझे क्या-क्या नहीं लगता तुम्हें इश्क़ करना अब इश्क़ जैसा नहीं लगता ख़ुश बहुत हुए रक़ीब* की बातें करके मुझसे लगता है मैं तुम्हें अब पहले…

Continue Reading
Close Menu