अवशेष

इश्क़ के इतने किस्सों में भी हम पीछे ही रह गए इश्क़ आया हिस्सों में और हम हिस्से ही रह गए।

Continue Reading

विरोध के स्वर

आप अराजकता की बात करते हैं,मैं सुधार की कोशिश करता हूँ,आप शायद डरते हैं सरकार सेमैं डर का तिरस्कार करता हूँ,आप जीते हैं आँख बचाकर सत्य सेमैं सत्य से दो-दो…

Continue Reading

मिलना

सिर्फ़ आमने-सामने बैठने कोऔर बैठकर बात करने कोमिलना नहीं कहतेमिलने के लिए बहुत ज़रूरी हैआत्मसमर्पण कर देनाजैसा अपराधी करते हैंसारे हथियार डालकरनिहत्थे हो जानाबिल्कुल वैसाअपने एक-एक गुनाह कोकबूल करनाजो हमने…

Continue Reading

शीर्षक अंत में है

धूप के भी क्या तेवर हैंकभी बहुत तीखेकभी नरमतो कभी कुनकुनेकभी-कभी तो लगता हैकि ये धूप न होतीतो इत्मीनान से दिन-दोपहरकहीं भी घूम-फिर लेतेपर साइंस कहता है किधूप तो लाइफ़…

Continue Reading

श्रुति

रोशनदान से,छनकर आता हुआ,धूप का एक कतरा,फर्श पर पड़े-पड़े,तुम्हारे नाम के शुरूआती लफ़्ज़ की,शक्ल लेता गया,कि जैसे!वो भी तुम्हें,कमरे में रखे रेडियो पर,"सुनकर,"अपनी खुशी इज़हार करते हो,बाखुदा!"दिल चाहता है,"कि इस…

Continue Reading

सफ़र

मैं रात भर उसे तकता रहा,वो पूरी रात बेफ़िक्री से सोती रही,इस तरह एक खूबसूरत लड़की ने,मुझे सारी रात सोने न दिया..!!!

Continue Reading

ग़लतफ़हमी

तुम्हारी दुनिया की रौनक भी मैं,तुम्हारी साँसों की खलिश भी मैं,ज़रा सोचकर देखो,मेरे बगैर तुम्हारी दुनिया कितनी सूनी है!

Continue Reading
Close Menu