अवशेष

इश्क़ के इतने किस्सों में भी हम पीछे ही रह गए इश्क़ आया हिस्सों में और हम हिस्से ही रह गए।

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कच्चे रिश्ते

मिट्टी के बर्तन में दरार तो साफ़ दिखती है लेकिन वो आयी किस तरफ़ से ये कोई नहीं बता सकता रिश्तों में भी ऐसा ही होता है हर कोई सोचता…

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क्यूँ का जवाब

मोहब्बत में जब कोई बदल जाता है उसका सच भी झूठ में बदल जाता है दुनिया की नज़र से देखकर प्यार को अच्छे-अच्छों का इक़रार बदल जाता है

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आख़िरी बात

दिल लगाकर वो मुझसे से क्या लेकर जायेंगे कुछ बातें कुछ राज़ कुछ इश्क़ लेकर जायेंगे जान से ज़्यादा तो ऊपरवाला भी नहीं ले सकता ये नीचे वाले इससे ज़्यादा…

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यथार्थ

इश्क़ में यूँ भी कभी होता है जब इश्क़ इश्क़ जैसा नहीं लगता जब चाँद चाँद ही लगता है और महबूब महबूब नहीं लगता

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शे’र

तुम्हें क्या पता कि मुझे क्या-क्या नहीं लगता तुम्हें इश्क़ करना अब इश्क़ जैसा नहीं लगता ख़ुश बहुत हुए रक़ीब* की बातें करके मुझसे लगता है मैं तुम्हें अब पहले…

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