ग़लती

मैं... मैं ग़लतियों का पुलिंदा हूँ और ख़ुदकी की ग़लती किसे दिखती है अक्सर नहीं दिखती पर जब कोई दिखाता है तो मैं कोशिश करता हूँ देखने की कभी-कभी नहीं…

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कच्चे रिश्ते

मिट्टी के बर्तन में दरार तो साफ़ दिखती है लेकिन वो आयी किस तरफ़ से ये कोई नहीं बता सकता रिश्तों में भी ऐसा ही होता है हर कोई सोचता…

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क्यूँ का जवाब

मोहब्बत में जब कोई बदल जाता है उसका सच भी झूठ में बदल जाता है दुनिया की नज़र से देखकर प्यार को अच्छे-अच्छों का इक़रार बदल जाता है

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बिखरे ख़याल

तुमसे बात करने के बादएक रख दिया था खिड़की के पासकुछ को बुकशेल्फ़दो-चार को फ़्रिज के ऊपरऔर एक-आध टांग दिया थाकीरिंग लटकाने वाले कील परतुम्हीं ने कहा था अपना ख़याल…

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