अवशेष

इश्क़ के इतने किस्सों में भी हम पीछे ही रह गए इश्क़ आया हिस्सों में और हम हिस्से ही रह गए।

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क्यूँ का जवाब

मोहब्बत में जब कोई बदल जाता है उसका सच भी झूठ में बदल जाता है दुनिया की नज़र से देखकर प्यार को अच्छे-अच्छों का इक़रार बदल जाता है

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आख़िरी बात

दिल लगाकर वो मुझसे से क्या लेकर जायेंगे कुछ बातें कुछ राज़ कुछ इश्क़ लेकर जायेंगे जान से ज़्यादा तो ऊपरवाला भी नहीं ले सकता ये नीचे वाले इससे ज़्यादा…

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यथार्थ

इश्क़ में यूँ भी कभी होता है जब इश्क़ इश्क़ जैसा नहीं लगता जब चाँद चाँद ही लगता है और महबूब महबूब नहीं लगता

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बेचारी

ख़ुशियाँ आके फुसफुसाती है कानों में ज़िन्दा कैसे रहूँ मैं ज़िन्दगी के तूफानों में

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असहिष्णुता

हिन्दू की बस्ती में मुसलमान डरा हुआ हैमज़हब की बस्ती में ईमान डरा हुआ हैशक़, फ़रेब और सियासत के चलतेहिंदुस्तान की धरती में इंसान डरा हुआ है।

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