ग़लती

मैं…
मैं ग़लतियों का पुलिंदा हूँ
और ख़ुदकी की ग़लती
किसे दिखती है
अक्सर नहीं दिखती
पर जब कोई दिखाता है
तो मैं कोशिश करता हूँ देखने की
कभी-कभी नहीं देख पाता
और इसमें भी ग़लती
हो ही जाती है

अवशेष

इश्क़ के इतने किस्सों में भी हम पीछे ही रह गए
इश्क़ आया हिस्सों में और हम हिस्से ही रह गए।

दूर होने के सवाल पर

ख़तरनाक लत समझते हैं?
सुबह उठते ही
बासे मुँह
सबसे पहले उसे मुँह लगाना,
फिर दिन में 12-15 बार
जब तलक होंठ उसे छू न लें
ज़ायक़ा साँसों में न उतरे
तब तक ख़ुद की
तह में न उतरना
न मिले तो ऐसा लगना
कि कबसे नहीं मिले
और मिल जाए तो सोचना
कि फिर कब मिलेंगे
ऐसी लत नहीं छूटती
जब तक कि
उसका कोई ऐसा राज़
पता न चल जाए
जो गले से उतरते हुए
कंठ को जला दे
और हृदय तक जिसकी ताप पहुँचे
कुछ ऐसा ही हुआ
कि चाय से मेरी दूरी बढ़ गयी
और बढ़ गयी दूरी
तुमसे भी!

बेहद ख़तरनाक लत थी
दोनों की!

कच्चे रिश्ते

मिट्टी के बर्तन में
दरार तो साफ़ दिखती है
लेकिन वो आयी किस तरफ़ से
ये कोई नहीं बता सकता
रिश्तों में भी ऐसा ही होता है
हर कोई सोचता है
कि दरार
उसने पैदा नहीं की
लेकिन कोई उसे
भरने के बारे में
क्यों नहीं सोचता?
रिश्ता है
बर्तन नहीं।

क्यूँ का जवाब

मोहब्बत में जब कोई बदल जाता है
उसका सच भी झूठ में बदल जाता है
दुनिया की नज़र से देखकर प्यार को
अच्छे-अच्छों का इक़रार बदल जाता है

आख़िरी बात

दिल लगाकर वो मुझसे से क्या लेकर जायेंगे
कुछ बातें कुछ राज़ कुछ इश्क़ लेकर जायेंगे
जान से ज़्यादा तो ऊपरवाला भी नहीं ले सकता
ये नीचे वाले इससे ज़्यादा क्या लेकर जायेंगे